Pregnancy and parturition


Fertilization और बच्चे के जन्म के बीच की अवधि को gestation period कहते है जो मानव में लगभग 9 महीने का होता है मानव के विकास को  दो periods में बाटा जा सकता है:-


(a) Prenatal (जन्म से पहले)

(b) Post natal (जन्म के बाद)


पहले दो महीने अर्थात 8 सप्ताह के विकास को embryonic period कहते है| 9वे  सप्ताह से जन्म तक के अवस्था को foetus कहते है| जन्म के समय या जन्म के बाद इसे new born या baby कहते है|  pregnancy को तीन – तीन महीने के तीन periods में बाटा गया है, जिसे trimesters कहते है|




Pregnancy in Human


1. The first trimester:- first trimester ,fertilization से प्रारम्भ होता है और इस period में अधिकतर आंतरिक अंग का निर्माण होता है| pregnancy के एक महीने के बाद embryo के heart का निर्माण होता है| वृद्धि करने वाले गर्भ की पहली पहचान के रूप में उसे सावधानी पूर्वक stethoscope की मदद से heart sound के रूप में सुना जा सकता है| pregnancy के दूसरे माह के अंत में गर्भ के limbs और digits(उगलिया) का विकास होता है| बारह सप्ताह (तीन महीने) के अंत तक अधिकतर major organ system का विकास हो जाता है, जैसे limbs, external genital organs इत्यादि पूर्णतः विकसित हो जाता है|


2. The second trimester:- पाँचवें महीने में साधारणतः गर्भ में movement और head के सतह पर बाल उगने प्रारम्भ हो जाते है|24 सप्ताह अर्थात (दूसरे trimester) के अंत में शरीर पतले hairs से ढंक जाता है upper और lower eyelid एक दूसरे से अलग हो जाते है और eyelash का निर्माण हो जाता है| सातवें महीने तक आंख खुल जाता है|और हड्डियाँ ossify अर्थात कड़ी हो जाती है।



3. The third trimester:- तीसरा trimester सातवें महीने से बच्चे के जन्म तक चलता है| गर्भ circulatory system और respiratory system के साथ अच्छी विकसित हो जाता है| अंतिम महीने में गर्भ का भार दुगुना हो जाता है| गर्भधारण करने के नवें महीने के अंत का गर्भ पूर्णता विकसित हो जाता है और जन्म के लिए तैयार हो जाता है|


Parturition in human





Fertilization के लगभग 266 दिनों के बाद या अंतिम menstrual period के 280 दिनों के बाद के बाद मानव के नवजात शिशु का जन्म होता है| pregnancy के अंत में बच्चे को बाहर निकालने के लिए uterus को तेजी से सिकुड़ने की आवश्यकता होती है| इन घटनाओं के क्रम को labour के नाम से जाना जाता है|बच्चे के जन्म के इस सम्पूर्ण प्रकिया को parturition कहते है|parturition एक जटिल neuroendocrine mechanism है| parturition का signal पूर्णतः विकसित गर्भ और placenta से प्रारम्भ होता है,जो धीरे-धीरे गर्भाशय में संकुचन उत्पन्न करता है उसे foetal ejection reflex कहते है।


जब बच्चे के जन्म का समय आता है तो pituitary gland से adreno corticotropic hormone(A.C.T.H)निकलता है जो adrenal gland को steroids निकालने के लिए उतेजित कर देता है| ये steroids placenta को उतेजित कर देता है जिस कारण placenta से prosta glandin मुक्त होता है यह pituitary gland निकलने वाले oxytocin के साथ मिलकर गर्भाशय की दीवारों में शक्तिशाली संकुचन उत्पन्न करता है| गर्भाशय में संकुचन और oxytocin में secretion के एक के बाद एक लगातार reflex के कारण बार-बार शक्तिशाली और शक्तिशाली संकुचन उत्पन्न होते चला जाता है|यह घटना 2-18 घंटों तक चलते रहता है।


इसी समय cervix पूर्णतः: फैल जाता है और amniotic sac फाट जाता है परिमाण यह निकलता है कि बच्चा uterus से birth canal parturition द्वारा बाहर निकल जाता है|बच्चे के जन्म के तुरंत बाद placenta भी uterus से बाहर आ जाता है जिसे after birth कहते है|labour को artificial रूप से oxytocin के injection द्वारा या prostaglandin को vagina में प्रवेश कराकर भी उत्पन्न कराया जा सकता है| यदि कोई स्त्री labour pain नहीं चाहती है तो वह बच्चे के जन्म के लिये शल्य प्रकिया का भी चुनाव कर सकती है जिसे caesarean कहते है|


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