AIDS Ki Puri Jankari


AIDS का पूरा नाम Acquired immuno deficiency syndrome है| यह एक आधुनिक pandemic अर्थात एक देश से दूसरे देश में फैलने वाला विश्वव्यापी जानलेवा रोग है| इसे पहली बार भारत में 1986 ईo में तमिलनाडु में report किया गया था| यदि इसका संक्रमण एक बार मनुष्य में हो जाए, तो हमेशा के लिए उसका जीवन समाप्त हो जाता है| इसे पहली बार 1981 ईo में Atlanta (USA) में report किया गया था| यह एक retrovirus द्रारा उत्पन्न होता है, जिसका genetic material RNA होता है|अमेरिका वैज्ञानिकों द्रारा इसका नाम Human T- Cell Lymphotropic Virus III या Human Cell Leukaemia Virus III रखा गया| Taxonomy के अंतर्राष्ट्रीय समिति ने मई 1986 ईo में इसका नाम Human Immunodeficiency Virus (HIV) रखा|इस virus में protein का एक capsule पाया जाता है जिसके अंदर genetic material (RNA) के दो छोटे-छोटे धागे और कुछ enzymes पाये जाते है|


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AIDS Ki  Jankari in Hindi


HIV विशेषकर thymus gland के  T4 – cells में प्रवेश करते है| ये शरीर के रोग निरोधी क्षमता से संबंधित B- cells इत्यादि में भी प्रवेश कर जाते है| Virus cell के genetic material का उपयोग करते है और reverse transcriptase enzyme का उपयोग करके RNA द्रारा अपने DNA का निर्माण करते है| virus का DNA जिसे provirus भी कहते है cell के DNA में प्रवेश कर जाता है| यह लम्बे समय तक निष्क्रिय अवस्था में पड़ा रहता है| इसके बाद viral DNA transcription द्रारा RNA का निर्माण करता है जो HIV के नए पीढ़ी का निर्माण करते है| T4 – cells के नष्ट हो जाने से शरीर का रोग निरोधी क्षमता समाप्त हो जाता है| इसका परिणाम यह निकलता है की शरीर में अनेक साधारण रोग और अनेक जानलेवा रोग के उत्पन्न होने की संभावना बढ़ जाती है|



AIDS के जटिल रूप को ARC अर्थात AIDS related complex कहते है| इसमें lymph nodes फूल जाता है, लगातार बुखार रहता है| रात में पसीना चलता है, लगातार खांसी रहता है, लगातार दस्त होते रहता है और शरीर का भार कम जाता है| इसमें nervous system अव्यवस्थित हो जाता है साथ ही साथ यादाशय खत्म होने लगता है| रोगी जल्दी सोच नहीं पता है या उदास रहता है|




HIV रोगी के रक्त में, sperms में  तथा CSF (cerebral spinal fluid) में अत्यधिक मात्रा में पाया जाता है| संक्रमित material रक्त और sperm होते है| प्रारम्भ में AIDS एक sexually transmitted disease(STD) के रूप में पाया जाता है| यह blood transfusion और दूषित सुई के उपयोग द्रारा भी फैलता है| यह संक्रमित माँ से उसके बच्चे में जन्म से पहले या जन्म के  समय placenta द्रारा फैलता है तथा माँ द्रारा बच्चे को दूध पिलाने से भी फैलता है|



इस रोग का न तो कोई टिका (vaccine) या न ही कोई उपचार उपलब्ध है| AIDS से ग्रसित मनुष्य की मृत्यु 3 वर्ष के अंदर-अंदर या तो संक्रमण से या cancers से हो जाता है| आज के युग में इसको नियंत्रित करने का उपाय यह है की लोगों को इस रोग की प्रकृति, इसके फैलने के तरीके, इसके जानलेवा प्रभाव के बारे में शिक्षित किया जाए तथा इसके बचाव के तरीके का प्रशिक्षण दिया जाए|


Aids ke lakshan


AIDS के लक्षण के रूप में कम से कम दो major signs और एक minor sign उत्पन्न होते है|

AIDS के लक्षण के major signs निम्नलिखित है:-

>> एक से अधिक महीने तक बुखार का होना|

>> 10% से अधिक शारीरिक भार का कम हो जाना|

>> महीनों तक पुराना दस्त अर्थात chronic diorrhoea का हो जाना|

>> त्वचा में घाव अर्थात tumour का हो जाना|


AIDS के लक्षण के minor signs निम्नलिखित है:-

>> एक से अधिक महीने तक खांसी रहना|

>> साधारणतः pruritic dermatitis नामक त्वचा संबन्धी रोग का हो जाना|

>> lymph nodes का बड़ा हो जाना|

>> मुंह सुखना|

>> मुंह में छाला पड़ जाना और लाल हो जाना|

>> एक साधारण yeast fungus के कारण जीभ, मुंह और गले पर उजली पट्टी पड़ जाना|


HIV AIDS ka karan




AIDS निम्नलिखित कारण से हो सकता है:- 

>> संक्रमित व्यक्ति से असुरक्षित यौन-संबंध बनाने से| 

>> AIDS से ग्रस्त रोगी पर प्रयोग किए हुए  Injections  को दूसरे व्यक्ति के शरीर में लगाने से। 

>> AIDS संक्रमित व्यक्ति से खून प्राप्त करने से।

>> AIDS  से ग्रस्त मां के द्रारा जन्म लेने वाले बच्चे को। 

>> AIDS से  ग्रस्त मां के दूध लेने से। 

>> दाढ़ी करते समय, टैटू लगाते समय और शरीर में कोई छेद करते समय उपयोग में लिए जाने वाले सुई, ब्लेड इत्यादि सामग्री HIV विषाणु से संक्रमित होने पर।  


AIDS निम्नलिखित प्रकार से नहीं होता है:-

>> AIDS रोग से ग्रस्त रोगी से हाथ मिलाने से, चूमने से या कसकर पकड़ने से। 

>> AIDS रोग से ग्रस्त रोगी के साथ रहने से या खाना खाने से। 

>> छींकने या खांसने से। 

>> मच्छर के काटने से।

>> आसु या थूक से AIDS के फैलने का कोई लिखित प्रमाण नहीं है।


AIDS से बचाव के लिए निम्नलिखित सावधानी बरते :-

>> अपने साथी से वफादार रहे। 

>> एक से ज्यादा व्यक्ति के साथ sex सम्बन्ध नहीं बनाने चाहिए। अगर किसी अन्य व्यक्ति के साथ sex संबंध बनाने भी हों तो हमेशा condom का प्रयोग करना चाहिए। 

>> जहां तक हो सके वेश्या या गलत लोगों से sex संबंध बनाने से बचना चाहिए। 

>> अगर बाहर दाढ़ी आदि बनवानी हो तो नाई से कहकर हमेशा नए ब्लेड का प्रयोग ही करवाएं। 

>> अस्पताल आदि में सुई लगवाते समय हमेशा नई सीरींज का ही प्रयोग करना चाहिए। 

>> अगर अस्पताल आदि में खून चढ़वाने की जरूरत पड़ जाए तो पहले पूरी तरह confirm हो जाएं कि जो खून आपको चढ़ाया जा रहा है वह किसी AIDS रोग से ग्रस्त रोगी का तो नहीं है।


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