Mammalian Eye


Mammalian eye एक प्रकार का महत्वपूर्ण sense organ  है जो वस्तु द्रारा reflect किये गए प्रकाश को ग्रहण करके उसे देखने में मदद करता है अतः इसे photo receptor भी कहते है| यह एक जोड़ा गोलाकार रचना के रूप में पाया जाता है जिसे eye ball कहते  है| प्रत्येक eye ball खोपड़ी के हड्डी के गङ्ढे अर्थात orbit में स्थित रहता है| इसका 1/5th भाग orbit के बाहर स्थित होता है| orbit में गति करने के लिए eye ball से 6 extrinsic muscles जुड़े रहते है जिसमें से चार rectum muscles होता है तथा दो oblique muscles होते है| आंख की रक्षा के लिए एक जोड़ा eyelid भी पाया जाता है| frog में एक पारदर्शक third eyelid भी पाया जाता है जिसे nictitating membrane कहते है| मनुष्य में यह लुप्त हो जाता है और आंख के comer में plica semilunaris के रूप में पाया जाता है| प्रत्येक eyelid के नीचे एक lachrymal gland पाया जाता है जो आँसुओं के द्रारा आंखों को नम बनाये रखने के लिए आवश्यक होता है| eye ball के internal structure का अध्ययन करने पर हम पाते है की यह तीन layer से घिरा होता है:-


mammalian-eye


Structure of Human Eye


1. Sclerotic:- यह eye ball का सबसे बाहरी layer है जो विशेष प्रकार के fibrous connecting tissue  से बना होता है|  इसका अगला भाग उभरा हुआ होता है| जिसे cornea कहते है| cornea एक delicate transparent membrane से ढका होता है जिसे conjunctiva कहते है|


2. Uvea (choroid):- यह eye ball का मध्य भाग है जो connective tissue तथा dark pigments से बना होता है| इसका अगला भाग मोटा होकर ciliary body में परिवर्तित हो जाता है जिसमें radial और circular ciliary muscles पाये जाते है| eye ball के अगले भाग पर choroid, sclerotic से अलग होकर iris का निर्माण करता है| iris के बीच एक pupil नामक छिद्र होता है| pupil के ठीक पीछे एक biconvex lens पाया जाता है जो lens capsule में स्तिथ होता है।




यह suspensory ligament की मदद से ciliary muscles से जुड़ा होता है| lens eye ball के chamber को अगले aqueous chamber तथा पिछले vitreous chamber में बांट देता है| aqueous chamber तथा vitreous chamber में क्रमशः जलीय पर्दाथ तथा गाढ़ा पर्दाथ पाया जाता है जिसे क्रमशः aqueous humour और vitreous humour कहते है|


3. Retina:- यह eye ball का सबसे inner layer है जो rod cells तथा cone cells से बना होता है| rod cells से अंधकार और प्रकाश का पता चलता है तथा cone cells से colour का पता चलता है| ये cells अंदर की ओर bilor neuron की मदद से जोड़े होते है| ये सभी neurons आपस में मिल कर optic nerve में परिवर्तित हो जाते है जो eye ball से बाहर निकल जाता है|


optic never के निकलने के स्थान पर cone cells  और rod cells absent होते है जिस कारण वस्तु का प्रतिबिंब इस बिंदु पर नहीं बन पता है अतः इस spot को blind spot कहते है| इसके ठीक ऊपर retina का सबसे sensitive area पाया जाता है जिसे yellow spot या area centralis कहते है| इस स्थान पर पाये जाने वाले गड्ढे को fovea centralis कहते है|



Working of eye:- किसी वस्तु से आने वाली प्रकाश की किरणें cornea तथा aqueous humour से होते हुए pupil को पास करके lens द्रारा retina के सतह पर उल्टा image बनाती है| retina के rod cells में पाया जाने वाला rhodopsin नामक visual pigment किरणों को अवशोषित कर लेता है जिस कारण rod cells sensitive हो जाते है| यह sensation optic nerve द्रारा brain तक पहुँच जाता है और मनुष्य वस्तु को देख लेता है|


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